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कौन हूँ मैं ...

Posted On: 6 Aug, 2014 social issues,कविता,Junction Forum में

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दिल ने पूछा कौन हूँ मै ,मेरी क्या पहचान है
अपने मूल्य से इस दुनिया में औरत क्यों अनजान है

जिस तरफ भी देखा ,एक खौफ सा दीखता है
आज भी पुरुष के आगे क्यों …औरत का मान सस्ता है

कही माँ , कही बहन बनी ,कभी बेटी बन जिन्हे संभाला है
आज उसी ने कदम-कदम पे हर रिश्ते को कुचल डाला है

कब तक ये आग जलेगी कब तक औरत दर्द सहेगी .
इक दिन वो भी आएगा जब हर औरत यही कहेगी

” सम्मान हमे न दोगे अगर सम्मान कहा से पाओगे
औरत न होगी गर धरती पर किसके भाई बाप कहलाओगे
आज अगर न औरत कि अस्मत की रक्षा ना कि तुमने
कल कन्यादान करने क लिए कन्या कहा से लाओगे ,,



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
August 6, 2014

aadarneeyaa swami vivekanand ji ke shabd hain,” naree anugaminee nahee,sahdharminee hai.naree purush kee leelasahcharee hai.”

pratima के द्वारा
August 6, 2014

सच कहा आपने सर …मै भी यही कहना चाहती हूँ किन्तु आज के इस समाज की सोच बदलती जा रही …


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