जज्बात मन के

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मन और मन का जीवन में स्थान

Posted On: 19 Jun, 2015 Others,social issues,Junction Forum में

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यु तो अक्सर ही मेरे मन में ऐसे कई सवाल और जवाब आते जाते रहते है लेकिन आज जिस बात ने मुझे परेशान किया  है वो भी एक आम बात है मगर फिर भी उसका जवाब बहुत उलझा हुआ है ..

दोस्तों , साँसे चलने से जिंदगी चलती हैं, दिल का धडकना बताता है के  हम जिन्दा है लेकिन वो क्या है जो साँसों और धडकनों के लिए भी जरुरी है , जिसके होने से ये ठीक ढंग से काम करते है और जिनकी अनुपस्थिति इनकी क्रिया में बाधा डालती है ..जवाब कुछ logical होना चाहिए ..है न! क्योकि ये तो विषय ही विज्ञानं का है जो पूरी तरह लॉजिक पर आधारित होता है | जवाब ऐसा है जिसकी पुरे शरीर में कही कोई specific जगह नही परन्तु वो प्रभावित पुरे शरीर को ही नही पूरी जिंदगी को करता है …मन और उसके अंदर की भावनाएं |

है कोई जगह ? हाँ लेकिन कहाँ  ? पता नही..

आज जिंदगी इतनी व्यस्त हो गई है कि खुद के लिए भी किसी के पास वक़्त नही ,सुबह उठाना , काम पर जाना और फिर आकर सोना फिर अगले दिन वही काम..इस बीच में कही कोई वक़्त नही होता कि इंसान अपने मन के हिसाब से जिंदगी जिए , इंसान मशीन हो गया है और इसी वजह से दिल भी केवल पम्पिंग मशीन बन के रह गया है , जिस दिन ये पम्पिंग मशीन रुकी जिंदगी रुक जाती है | लेकिन मन कि भावनाए एक उत्प्रेरक कि तरह काम करती है जो इस मशीन की क्रियाविधि को बढ़ा भी देती है और कम भी कर देती है  निर्भर इस बात पर होता है कि आप कि भावनाएँ है कैसी? आप के जीने का अंदाज कैसा है ? क्या आपको पता है के आपके मन के लिए किस बात की प्राथमिकता ज्यादा है और क्या गैर जरुरी? हम अक्सर वही काम करते है जो हमारी दिनचर्या में जरुरी होता है ,कभी ऑफिस ,कभी घर, कभी पति/पत्नी , कभी बच्चे कभी परिवार… बस.|आपके लिए आपकी जिंदगी में जगह कहा है ? आपके मन की जगह कहा है ? न शरीर में ना शरीर से बाहर आपकी जिंदगी में |

एक छोटी सी बात है कि आप कुछ देर t.v. देखना चाहते है मगर किसी कारण वश उसवक्त नही देख पाते जब आपका पसंदीदा प्रोग्राम आ रहा होता है , आप न चाहकर भी झुंझलाते है और फिर आप उस तरफ से अपना ध्यान हटाते है और उस काम की तरफ बढ़ जाते है जो आपको ज्यादा जरुरी लगा लेकिन क्या पूरी तरह से मन हटा?आपको किताबे पढने का शौक हो और आप को पढने का वक़्त ही न मिले ?इसी तरह के ऐसे कई काम होते है जो आपको पसंद तो है, जिनका शौक भी है आपको परन्तु वक़्त नही मिलता इसलिए हम अपने रोज के जरुरी कामो में ही मन लगा लेते है और हमे लगता है कि जिंदगी सही और मस्त चल रही है , और ये सही भी होता है लेकिन उसी के विपरीत कभी अपने शौक के काम के लिए अपनी व्यस्त दिन चर्या से कुछ पल निकल कर देखिये क्या कोई अन्तर नही आता ?आता है ..कही ना कही आपके अंदर एक सुकून और ख़ुशी होती है जो आपको अंदर से relax करती है और उसी के कारण आपको दुसरे कामों  के लिए भी एक अलग सी energy मिलती है |

आपके द्वारा अपनी व्यस्त life से चुराया वो पल जिसमे आपने अपने मन का कुछ किया वो आपकी जिंदगी में आपके मन कि जगह है और उसके बाद जो आपके अंदर सुकून का अहसास हुआ उसे आप दिल नामक पम्पिंग मशीन का उत्प्रेरक या greasing oil भी कह सकते है जो आपके दिल और दिमाग को relax way में काम करने में मदद करता है और बिमारियों से दूर रखता है |

हम सभी जानते है कि परेशानियां और उलझने जीवन कि उम्र कम कर देती है क्योंकि उनका सीधा असर हमारे दिल-दिमाग पर होता है लेकिन यही छोटे छोटे पल जिसमे आप-अपने जीवन में अपने मन को जगह देते है , कुछ देर के लिए ही सही अपने मन को प्राथमिकता देते है तो यही दिल-दिमाग अपना काम अच्छे से कर पाते है और आपकी उम्र भी बढा देते है | पता सबको होता है फिर भी क्यों हम ऐसा नही कर पाते? क्या सचमे इतना मुश्किल होता है इन सब कामों के लिए वक़्त निकालना ?

अक्सर हमे अपने मन को टालते-टालते उसे बार-बार टालने कि आदत पड़ जाती है , और हम अपना काम करते रहते है लेकिन ये मन को टालना धीरे -धीरे ही सही कही ना कही आपके जीवन को प्रभावित करता  रहता  है और हमें पता भी नही चलता और जब पता चलता है तो वो एक डिप्रेशन का रूप ले चुकी होता  है | ऐसे cases अक्सर औरतों में खासकर घरेलु औरतों में देखे जाते है लेकिन कामकाजी पुरुष और स्त्री भी इससे वंचित नही ही | सोच कर देखिये जीवन के कितने पल आप केवल और केवल अपने लिए जीते है ? जैसे योग आपके जीवन में ताजगी लाता है , उर्जा देता है जिंदगी को नए और सजीव तरीके से सकारात्मक तरीके से जीने का | वैसे ही अपने मन को एक छोटा सा सही मगर अपने जीवन में स्थान देना भी एक तरह का योग ही है जो हमारे अंदर की नकारात्मक उर्जा और अवसाद (depression)को हमसे दूर करता है जिससे मन और मस्तिष्क सुचारू रूप से अपना काम कर पाते है |

जरुरी नहीं कि ये शौक किताबें पढना या अकेले में अपने लिए वक़्त बिताना ही हो , हों सकता है आपका शौक किताबो से हटकर आपके बच्चो के साथ खेलने या जीवनसाथी के साथ बैठकर कुछ पल बाते करना हो गया हो |

हो सकता है आपके-अपनों के मन को भी आपके वक़्त की जरुरत हो जिसकी अनुपस्थिति उनके मन को भी प्रभावित कर रही हो और आपको पता भी ना चल रहा हो तो क्यों न कुछ खुशियों के पल अपने-अपनों को भी दिया जाये और खुद के मन को भी खुश कि जाये ..

कहने का आशय बस इतना है कि जीवन में भाग दौड़ तो साँसों के साथ ही ख़तम होती है लेकिन उन्ही साँसों में हमे अपने लिए और अपने अपनों के लिए भी वक़्त निकालना होता है तो क्यों न शुरुआत आज से ही की जाये..

यदि हर कोई हरवक्त नही लेकिन कभी कभी ही अपने लिए ऐसा कर पाए तो शायद डिप्रेशन, अकेलापन, हार्ट अटैक  इत्यादि जैसी बिमारियों का कुछ प्रतिशत ही सही मगर कम तो जरुर ही होगा



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